रोहतांग पास

यह दर्रा, दुनिया की सबसे ऊंची चलने वाली रोड़ है जहां हर साल लाखों पर्यटक इस लॉफी पहाड़ पर भ्रमण करने आते हैं। यह दर्रा समुद्र स्‍तर से 4111 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है जहां से मनाली का शानदार दृश्‍य दिखाई पड़ता है। मनाली से इस दर्रा की दूरी 51 किमी. है। यहां से पहाडों, सुंदर दृश्‍यों वाली भूमि और ग्‍लेशियर का शानदार दृश्‍य देखा जा सकता है। इन सभी के अलावा इस पर्यटन स्‍थल में आकर पर्यटक ट्रैकिंग, माउंटेन बाइकिंग, पैरालाइडिंग और स्किंईंग भी कर सकते हैं। यह पास साल में मई के महीने में पर्यटकों के लिए खुल जाता है और सितम्‍बर में भारी बर्फबारी के कारण बंद कर दिया जाता है। यहां से गुजर कर जर्नी करना घातक हो सकता है। यहां की यात्रा के लिए पर्यटकों को आर्मी से परमिशन लेनी पड़ती हैं।

सोलांग घाटी

सोलांग घाटी मनाली की प्रसिद्ध और नामीगिरामी पर्यटन स्‍थल है। 300 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह घाटी पर्यटकों के कौतूहल को बढ़ा देती है। इस घाटी को स्‍नो प्‍वांइट के नाम से भी जाना जाता है। यह व्‍यास कुंड और सोलांग घाटी के बीच में ही स्थित है। सर्दियों के दौरान पर्यटक यहां आयोजित होने वाली स्किईंग प्रतियोगिता में भाग लेते हैं। यह प्रतियोगिता सर्दियों के दौरान विंटर स्किईंग फेस्टिवल के नाम से आयोजित की जाती है। यहां आकर पर्यटक पैरालाइडिंग, जारॅविंग और घुड़सवारी का लुत्‍फ उठा सकते हैं। यहां एक मंदिर भी है जो भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर पहाडी की चोटी पर स्थित है जिसमें साल में हजारों पर्यटक आकर दर्शन करते हैं।

हिडिम्बा देवी मंदिर

यह मंदिर मनाली में सबसे फेमस जगह है। यह मंदिर एक गुफा में बना हुआ है जो देवी हिडम्‍बा को समर्पित है। देवी हिडम्‍बा, हिडम्‍ब की बहन थी। यह मंदिर हिमालय की तलहटी पर स्थित है जिसके आसपास हरियाली है और ि‍ सडार के जंगल हैं। इस मंदिर का निर्माण 1553 ई. में एक पत्‍थर में किया गया था। पत्‍थर को इस प्रकार काटा गया कि उसका आकर गुफानुमा हो गया। इस पत्‍थर के अंदर जाकर श्रद्धालु दर्शन कर सकते है और विशेष पूजा का आयोजन कर सकते हैं। कहा जाता है यहां पर होने वाली विशेष पूजा को घोर पूजा के नाम से जाना जाता है। यह पूजा मंदिर में ही आयोजित की जाती है। हर साल 14 मई को मंदिर में देवी जी का जन्‍मदिन मनाया जाता है जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं और दर्शन करते हैं।

मणिकरण

मणिकरण हिन्दू और सिख दोनों के लिए पवित्र धार्मिक स्थल है। यह 1737 मीटर की ऊंचाई पर स्थित, कुल्लू से 45 कि.मी दूर हिमाचल राज्य में है। मणिकरण का अर्थ है "बहुमूल्य रत्न"। पौराणिक कथा अनुसार भगवन शिव की पत्नी पार्वती ने अपना बहुमूल्य रत्न यहाँ के किसी जलाशय में खो दिया। मां पार्वती के निवेदन पर भगवन शिव ने अपने अनुयायीयों को रत्न खोजने के लिए कहा पर वे इसमें विफल रहे। तब भगवन शिव ने क्रोध में अपना तृतीय नेत्र खोला, जिसके कारण धरती में दरार पड़ी और बहुमूल्य रत्नों और जवाहरातों का सृजन हुआ। गुरु नानक देवजी गुरुद्वारा मणिकरण का प्रमुख आकर्षक स्थल है। यह धारणा है कि सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव अपने 5 चेलों के साथ इस स्थान पर आये थे। यहाँ गुरुद्वारा में बहता गर्म पानी लोगों के लिये एक मुख्‍य आकर्षण है।

नग्‍गर

नग्‍गर में कई पर्यटन स्‍थल है जो देखने में काफी आकर्षक हैं और उनका ऐतिहासिक महत्‍व भी है। यहां के मुख्‍य पर्यटन स्‍थल जगटीपट्ट और नग्‍गर कैसल हैं। इस कैसल का निर्माण आज से 500 साल पहले किया गया था I इसके अलावा, यहां निकोलस रियोरिच आर्ट गैलरी भी है जिसे रूसी पेंटर ने अपने बेटे के लिए बनाया था, इसमें रियोरिच और उसके बेटे की कई पेंटिग्‍स लगी हुई हैं। यहां आकर पर्यटकों को दपगो शिड्रपुलिंग मठ को देखने भी आना चाहिए जो व्‍यास नदी के तट पर स्थित है। इस मठ का उद्घाटन परम पावन दलाई लामा ने किया था। आध्यात्मिक यात्रियों के लिए एक प्रमुख गंतव्य स्‍थल है। इस नगरी में श्रद्धालुओं के दर्शन करने हेतू कई मंदिर है जैसे- त्रिपुरा सुंदरी मंदिर, चामुंडा भगवती मंदिर और मुरलीधर मंदिर। यह सभी मंदिर अपनी स्‍थापत्‍य शैली और यहां मनाए जाने वाले त्‍यौहारों के लिए जाने जाते हैं।

माल रोड

मनाली के बीचों-बीच शहर में माल रोड़ है जहां पर्यटक शापिंग का जमकर लुत्‍फ उठा सकते हैं। सेंट्रल मार्केट में स्थ्‍िात इस माल रोड़ में आकर पर्यटक जमकर शापिंग करते हैं। यहां से पर्यटक कल्‍लू कैप, शॉल और अन्‍य ऊनी कपड़े भी खरीद सकते हैं। इस रोड़ में कई प्रकार के स्‍थानीय भोजन भी मिलते हैं जिनका स्‍वाद चखा जा सकता है। इसके अलावा यहां कई नामीगिरामी फूड चैन भी खुली हुई हैं जहां से पर्यटक देशी और विदेशी भोजन का स्‍वाद उठा सकते है। इन जगहों मिलने वाला खाना पूरी तरह हाइजिनिक मील होता है।

Top